Save Ganga campaign launched inlaid lock on the Exploration Center

Save Ganga campaign launched inlaid lock on the Exploration Center –

गंगा बचाओ अभियान शुरू पर अन्वेषण केंद्र पर ताला जड़ा
नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में गंगा अन्वेषण केंद्र और गंगा प्रयोगशाला पर वर्ष 2011 से ताला लगा हुआ है। ऐसे समय में जब केंद्र सरकार ने गंगा सफाई के लिए अभियान छेड़ रखा है। सरकार में इसके लिए अलग से मंत्रालय बनाया गया है और सरकार इसके लिए जमीन-आसमान एक करने की बात कर रही है, उसी समय यह विरोधाभास सामने आया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाली इस प्रयोगशाला के लिए न तो अब कोई प्रमुख तलाशा जा रहा है और न ही इसे फिर से शुरू करने को लेकर कोई कदम उठाए जा रहे हैं। जबकि यहां पर गंगा और नदी संरक्षण को लेकर न केवल 54 छात्रों को एमटेक कराई जा चुकी है बल्कि दो छात्रों ने तो यहां से पीएचडी तक की है।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्रों का कहना है कि यह केंद्र करीब 80 हजार स्कवायर फुट में बना है। इसमें से अस्सी प्रतिशत  क्षेत्र में गंगा का मॉडल बनाया गया था। यहां पर गंगा और नदियों को लेकर कई प्रयोग किए जाते थे। वर्ष 1985 में इस केंद्र की स्थापना नदियों और गंगा के जीवन पर अध्ययन के लिए किया गया था। तत्कालीन वाइस चांसलर ने उस समय नदियों और गंगा संरक्षण के महत्व को समझते हुए प्रोफेसर यूके चौधरी को इसका  प्रमुख बनाया था। वह वर्ष 1974 से ही नदी इंजीनियरिंग पर कार्य कर रहे थे।
उनके कार्यकाल में यहां पर यूजीसी सहित विभिन्न संस्थानों की ओर से दिए गए करीब 7 प्रोजेक्ट भी पूरे किए गए। उनके निर्देशन में 54 छात्रों ने एमटेक किया तो वहीं दो छात्रों ने पीएचडी भी की। वर्ष 2011 में प्रो चौधरी की सेवानिवृत के बाद से ही यहां पर ताला लगा
हुआ है। प्रोफेसर यूके चौधरी हाल में उस समय चर्चा में आए थे जब उन्होंने गंगा संरक्षण पर देश की 7 आईआईटी सहित देश के कुल 20 संस्थानों की ओर से प्रकाशित रपट को बकवास करार देते हुए खारिज कर दिया था। उन्होंने इस रपट को लेकर 54 बिंदु गिनाए थे और कहा था कि ज्यादातर कट एंड पेस्ट स्टडी हैं। जब कोई नदी विशेषज्ञ ही नहीं था तो यह विशेष रपट कैसे हुई।
एक जानकार ने कहा कि इस केंद्र के बंद होने से सबसे अधिक नुकसान उन छात्रों को हो रहा है जिन्होंने एमटेक के बाद नदी-गंगा पर पीएचडी के लिए आवेदन किया है। जबकि यह केंद्र कुछ लाख रुपए में शुरू हो सकता है। इससे इन छात्रों को भी राहत मिलेगी। इस मामले पर प्रोफेसर यूके चौधरी ने दैनिक भास्कर से कहा कि यह केंद्र वर्ष 2011 से बंद है। इससे पहले यहां पर गंगा मॉडल पर कई अध्ययन किए गए थे। लेकिन इसे आगे किन कारणों से नहीं चलाया जा रहा है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। अगर सरकार गंगा बचाने के लिए अभियान चला रही है तो काशी विश्वविद्यालय के यह केंद्र काफी मददगार साबित होगा।

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